कई बार आपने मॉल में शॉपिंग करते वक्त या मेट्रो स्टेशन पर देखा होगा कि लोग बस अपना स्मार्टफोन या डेबिट कार्ड POS मशीन के पास लाते हैं और बिना किसी पिन या स्वाइप के भुगतान पूरा हो जाता है। इसी तरह दो फोन्स को आपस में सटाकर तुरंत संपर्क जानकारी या फोटो शेयर कर ली जाती है। यह सब जिस तकनीक की मदद से संभव होता है, उसे NFC कहा जाता है।
अगर आपके स्मार्टफोन में NFC सपोर्ट मौजूद है, तो आपके मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह काम कैसे करता है और क्या यह इस्तेमाल करने में पूरी तरह सुरक्षित है। Near Field Communication यानी NFC एक वायरलेस कनेक्टिविटी तकनीक है जो बेहद कम दूरी पर काम करती है।
इस तकनीक की सबसे खास बात इसकी सादगी और तेजी है। इसके लिए दो डिवाइस को आपस में बहुत करीब, आमतौर पर कुछ सेंटीमीटर की दूरी पर लाना होता है। इस वजह से बिना किसी जटिल सेटअप के डेटा ट्रांसफर संभव हो पाता है।
NFC Technology क्या है और यह कैसे काम करती है?
NFC का पूरा नाम Near Field Communication है। नाम से ही स्पष्ट है कि यह तकनीक बहुत पास स्थित दो डिवाइस के बीच संपर्क स्थापित करती है। आमतौर पर NFC की कार्य क्षमता 4 सेंटीमीटर या उससे कम की दूरी तक सीमित होती है। इस तकनीक की बुनियाद RFID यानी Radio Frequency Identification प्रणाली पर टिकी है।
जब दो NFC सक्षम डिवाइस एक-दूसरे के करीब लाए जाते हैं, तो उनके बीच इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियो तरंगों के जरिए डेटा का आदान-प्रदान होता है। इनमें से एक डिवाइस एक्टिव होता है जो ऊर्जा पैदा करता है और दूसरा पैसिव हो सकता है जो बिना किसी बैटरी के काम करता है।
NFC डिवाइस मुख्य रूप से तीन अलग-अलग मोड में कार्य करते हैं:
- Reader/Writer Mode: इस मोड में आपका फोन किसी NFC टैग में मौजूद डेटा को पढ़ सकता है या उस पर नई जानकारी लिख सकता है।
- Peer-to-Peer Mode: इसमें दो NFC स्मार्टफोन आपस में कनेक्ट होकर सीधे फाइल या कांटेक्ट शेयर कर सकते हैं।
- Card Emulation Mode: इस मोड में आपका स्मार्टफोन किसी क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या एक्सेस पास की तरह व्यवहार करने लगता है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चालू करने के लिए किसी तरह की मैन्युअल पेयरिंग, पासवर्ड या पिन की जरूरत नहीं पड़ती। जैसे ही दो कंपैटिबल डिवाइस तय दूरी के भीतर आते हैं, कनेक्शन स्वतः स्थापित हो जाता है।
NFC और Bluetooth में क्या मुख्य अंतर हैं?
कई लोग NFC और Bluetooth को एक समान समझ लेते हैं क्योंकि दोनों ही बिना तार के डेटा ट्रांसफर करने का काम करते हैं। हालांकि दोनों के काम करने के तरीके और इस्तेमाल के उद्देश्यों में काफी अंतर होता है।
पहला प्रमुख अंतर कनेक्ट होने की गति का है। Bluetooth डिवाइस को आपस में जोड़ने के लिए पेयरिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें डिवाइस सर्च करना, कोड मिलाना और अनुमति देना शामिल है। इस प्रक्रिया में कुछ सेकंड लग जाते हैं। वहीं दूसरी ओर NFC में कनेक्शन 100 मिलीसेकंड से भी कम समय में तुरंत बन जाता है।
दूसरा अंतर कार्य करने की दूरी का है। Bluetooth 10 मीटर या उससे अधिक दूरी तक काम कर सकता है, जबकि NFC केवल 4 सेंटीमीटर की बेहद सीमित दूरी में ही कार्य करता है। भले ही कम दूरी होना पहली नज़र में एक सीमा लगे, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह NFC की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
तीसरा अंतर बिजली की खपत का है। NFC डेटा भेजते समय बहुत कम बैटरी का उपयोग करता है। पैसिव NFC टैग को तो खुद की बैटरी की भी जरूरत नहीं होती, वे रीडर से निकलने वाले रेडियो सिग्नल से ही आवश्यक पावर प्राप्त कर लेते हैं।
Contactless Payments: कार्ड और फोन से बिना छुए भुगतान
NFC तकनीक का सबसे व्यापक और लोकप्रिय इस्तेमाल Contactless Payments में देखने को मिलता है। आपने अपने बैंक के नए डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर एक छोटा सा वायरलेस सिग्नल जैसा प्रतीक बना देखा होगा। यह निशान दर्शाता है कि आपका कार्ड NFC चिप से लैस है।
जब आप किसी दुकान या स्टोर पर खरीदारी करते हैं, तो आपको कार्ड को स्वाइप करने या मशीन के अंदर डालने की आवश्यकता नहीं होती। आपको बस अपने NFC कार्ड को POS मशीन के ऊपरी हिस्से के पास 2 से 3 सेकंड के लिए रखना होता है। मशीन कार्ड की चिप से सुरक्षित तरीके से जानकारी पढ़ लेती है और भुगतान पूरा हो जाता है।
इसी तरह स्मार्टफोन में Google Pay या अन्य डिजिटल वॉलेट ऐप्स के माध्यम से भी tap-to-pay सुविधा काम करती है। जब आप अपने फोन के वॉलेट ऐप में अपने कार्ड को जोड़ते हैं, तो फोन का NFC चिप कार्ड इम्यूलेशन मोड में चला जाता है। भुगतान के वक्त फोन को POS मशीन के पास ले जाने से पेमेंट प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से, इस प्रक्रिया में आपका वास्तविक कार्ड नंबर मर्चेंट या POS मशीन के साथ साझा नहीं होता। इसके स्थान पर एक गुप्त डिजिटल टोकन का उपयोग किया जाता है। साथ ही फोन अनलॉक होने पर ही NFC पेमेंट काम करता है, जिससे अनधिकृत उपयोग का खतरा ना के बराबर रह जाता है।
NFC Tags क्या हैं और ये कैसे काम आते हैं?
NFC Tags छोटे, बेहद सस्ते और बिना बैटरी वाले स्टिकर या प्लास्टिक चिप्स होते हैं। इनके अंदर एक छोटी सी माइक्रोचिप और तांबे का एंटीना लगा होता है। चूंकि इनमें अपनी कोई पावर सप्लाई नहीं होती, इसलिए ये तब तक निष्क्रिय रहते हैं जब तक कोई एक्टिव रीडर डिवाइस यानी स्मार्टफोन इनके संपर्क में नहीं आता।
इन टैग्स को स्मार्टफोन ऐप्स की मदद से अलग-अलग कामों के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। आप अपने दैनिक जीवन के कई छोटे-छोटे कामों को NFC टैग्स की मदद से ऑटोमैटिक बना सकते हैं।
उदाहरण के लिए, आप अपने बेड के पास एक NFC टैग चिपका सकते हैं। रात को सोने से पहले जैसे ही आप अपना फोन उस टैग से छुएंगे, फोन अपने आप साइलेंट मोड पर चला जाएगा और अलार्म सेट हो जाएगा।
इसी तरह कार के डैशबोर्ड पर लगे टैग के पास फोन रखने से ब्लूटूथ नेविगेशन और गूगल मैप्स स्वतः चालू हो सकते हैं। आज के समय में बिजनेस कार्ड्स पर भी NFC टैग का प्रयोग हो रहा है, जिससे सामने वाला व्यक्ति कार्ड को छूकर आपका कांटेक्ट नंबर सीधे अपने फोन में सेव कर सकता है।
Access Control और Smart Cards में उपयोग
कार्यालयों, आवासीय सोसायटियों और सार्वजनिक परिवहन में पहचान स्थापित करने और सुरक्षा द्वार खोलने के लिए NFC तकनीक का उपयोग काफी समय से हो रहा है।
मेट्रो स्टेशनों पर यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले स्मार्ट कार्ड्स NFC तकनीक पर ही आधारित होते हैं। जब आप कार्ड को गेट के सेंसर के पास लाते हैं, तो सेंसर तुरंत कार्ड का बैलेंस जांच लेता है और गेट खोल देता है। इससे लंबी लाइनों से बचाव होता है और आवाजाही तेज बनी रहती है।
कॉर्पोरेट दफ्तरों में कर्मचारियों के उपस्थिति और एंट्री कार्ड भी इसी तकनीक से काम करते हैं। कार्ड को गेट रीडर के सामने रखने से सेकंड के छोटे हिस्से में पहचान सत्यापित हो जाती है।
इसके अलावा आधुनिक स्मार्ट लॉक्स में भी NFC का प्रयोग बढ़ रहा है। अब भौतिक चाबियों के बजाय अपने स्मार्टफोन या स्मार्ट बैंड को दरवाजे के पास लाकर लॉक खोला जा सकता है। इससे चाबी खोने या चोरी होने का जोखिम खत्म हो जाता है।
Device Pairing और Data Transfer
दो इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस को आपस में जल्दी और आसानी से कनेक्ट करने के लिए NFC एक बेहतर माध्यम है। यद्यपि बड़ी फाइलों को भेजने के लिए NFC की स्पीड कम होती है, लेकिन यह डिवाइस के बीच शुरुआती कनेक्शन स्थापित करने में बेहद उपयोगी है।
यदि आपके पास NFC सपोर्ट वाला ब्लूटूथ हेडफोन या स्पीकर है, तो आपको फोन की ब्लूटूथ सेटिंग्स में जाकर नए डिवाइस को खोजने और पेयर करने की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता। आप बस अपने फोन के पिछले हिस्से को स्पीकर के NFC लोगो से स्पर्श कराते हैं, और दोनों डिवाइस तुरंत कनेक्ट हो जाते हैं।
दो स्मार्टफोन्स के बीच छोटे डेटा जैसे वेब पेज का लिंक, लोकेशन, कांटेक्ट विवरण या छोटी फोटो शेयर करने के लिए भी NFC का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए दोनों फोन्स को आपस में सटाकर स्क्रीन पर टैप करना होता है।
स्मार्ट होम डिवाइसेज को सेट करते समय भी NFC का उपयोग होता है। नया वाई-फाई राउटर या स्मार्ट प्लग कॉन्फ़िगर करते समय केवल फोन को उस डिवाइस पर बने टैग से छुड़ाने पर सेटअप ऐप खुद-ब-खुद सही सेटिंग्स लोड कर लेता है।
NFC की सुरक्षा और ध्यान रखने योग्य बातें
किसी भी वायरलेस तकनीक को अपनाते समय सुरक्षा संबंधी चिंताएं होना स्वाभाविक है। हालांकि NFC अपनी संरचनात्मक विशेषताओं के कारण अन्य वायरलेस तकनीकों की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जाती है।
NFC की सबसे बड़ी सुरक्षा इसकी अत्यंत कम दूरी है। चूंकि डेटा ट्रांसमिशन के लिए डिवाइस का 4 सेंटीमीटर से भी कम दूरी पर होना अनिवार्य है, इसलिए किसी दूर बैठे हैकर के लिए हवा में तैरते सिग्नल को इंटरसेप्ट करना व्यावहारिक रूप से बहुत मुश्किल होता है।
इसके बावजूद सुरक्षित उपयोग के लिए कुछ बुनियादी बातें ध्यान में रखना जरूरी है:
- जब आप NFC सुविधाओं का उपयोग न कर रहे हों, तो अपने स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर इसे ऑफ रख सकते हैं।
- सार्वाजनिक स्थानों या भीड़भाड़ वाली जगहों पर अपने NFC सक्षम डेबिट व क्रेडिट कार्ड्स को RFID ब्लॉकिंग वॉलेट या स्लीव में सुरक्षित रखें।
- पोस्टर या अनजानी जगहों पर लगे किसी भी अज्ञात NFC टैग को बिना जांचे अपने फोन से स्कैन न करें, क्योंकि वह आपको किसी संदेहास्पद वेब लिंक पर भेज सकता है।
- अपने स्मार्टफोन में हमेशा मजबूत स्क्रीन लॉक, पिन या बायोमेट्रिक सुरक्षा सक्रिय रखें ताकि फोन खोने पर भी NFC पेमेंट का गलत इस्तेमाल न हो सके।
NFC तकनीक ने हमारे रोजमर्रा के लेन-देन, कनेक्टिविटी और एक्सेस कंट्रोल को बेहद आसान और समय की बचत करने वाला बना दिया है। यदि आपके स्मार्टफोन या बैंक कार्ड में यह फीचर मौजूद है, तो इसकी सही जानकारी और सुरक्षा उपायों को अपनाकर आप इसका पूरा लाभ उठा सकते हैं।
